Home जीवनमंत्र खोद खाद धरती सहै, काट कूट वन राय’-महात्मा कबीर, जीवनसूत्र, 24 सी

खोद खाद धरती सहै, काट कूट वन राय’-महात्मा कबीर, जीवनसूत्र, 24 सी

महात्मा कबीर वाणी

निंदा या कठारे वचनों को साधरण व्यक्ति सहन नहीं कर पाता है। वो विचलित हो जाता है। क्रोध करने लगता है।

आपा खो देता है। जिस व्यक्ति ने कठोर वचनों और निंदा को सहन कर लिया वो साधु हो जाता है और परम शांति की ओर बढऩे लगता है।


महात्मा कबीर ने कहा है

खोद खाद धरती सहै, काट कूट वन राय।
कूटिल वचन साधु सहै, और से सहा ना जाए।


अर्थात खुदाई, जुताई और खाद को अपने अंदर धरती ही सह सकती है और कूट और कटाई को जंगल ही सहन कर सकते हैं।

इसी प्रकार कड़वे और कुटिल वचनों को साधु ही सहन कर सकता है। साधारण व्यक्ति नहीं।

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