Home जीवनमंत्र भगवान एक है,स्वरुप अलग-अलग-जीवनसूत्र 24 सी

भगवान एक है,स्वरुप अलग-अलग-जीवनसूत्र 24 सी

आज का जीवनसूत्र

चार यात्री एक साथ यात्रा पर थे !उनमें एक पर्शियन था ! दूसरा तुर्क , तीसरा अरबी तथा चौथा  यूनानी ! उनकी फल खाने की इच्छा हुई ! ख़र्च करने के लिए उनके पास पैसे बहुत कम थे !पर्शियन ने कहा मै अंगूर खाना चाहता हूँ ! तुर्की ने कहा नहीं मुझे तो उज़ूम खाने हैं ! अब अरबी भड़क गया , ‘नहीं मुझे तो इनाब चाहिए यूनानी कहां चुप रहता , उसने कहा मैं तो सटाफ़िल खाऊंगा ! अब शुरू हुआ चारों में घमासान ! कोई मानने को तैयार नहीं ! लड़ाई शुरू ! 

खैर , एक विद्वान फ़क़ीर वहां से गुजर रहा था ! उसने उनकी लड़ाई सुनी और कहा पैसे मुझे दो ! फल मैं ला के देता हूँ ! चारों मान गए ! फ़क़ीर गया और दिए गए पैसे के अंगूर ले आया ! 

तुर्क ने तुरंत कहा अरे ये तो मेरे उज़ूम हैं ! अरबी ने कहा यही तो मैं मांग रहा था , ये मेरे इनाब हैं ! यूनानी ने कहा ये तो मेरे स्टाफ़िल हैं ! फ़क़ीर ने समझाया , तुम सब एक ही फल मांग रहे थे ! फ़िर भी लड़ रहे थे ! दरअसल पर्शियन के अंगूर को , तुर्की में उज़ूम , अरबी में इनाब और ग्रीक में स्टाफ़िल कहते हैं !

लडऩे से पहले समझ लें

एक सूफ़ी कहानी

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