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महम की धरती किस फल के बागों के लिए है उपयुक्त? कौन सी खेती करके किसान कमा सकते हैं लाखों? किसानों को मिल रहा है अनुदान!

जिला बागवानी अधिकारी ने बलम्भा में दी जानकारी

महम
गिरता भू जल स्तर चिंता का कारण है। प्रदेश सरकार भू जल संरक्षण की दिशा में कदम बढ़ा रही है। जिसके चलते धान के स्थान पर फलों के क्षेत्र को बढ़ावा दिया जा रहा है। महम उपमंडल में भी इस दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। इलाके में धान के स्थान पर बागों को बढ़ावा दिया जाएगा।
जिला बागवानी अधिकारी डॉ. कमल सैनी ने बलम्भा गांव के किसानों को एक संगोष्ठी के दौरान बताया कि बाग लगाने से किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी और भू जल संरक्षण भी हो सकेगा। जिला में 300 एकड़ में नए बाग लगाए जाएंगे। यह लक्ष्य तय किया गया है। इन बागों पर सरकार की ओर से विशेष अनुदान दिया जाएगा। इसके लिए किसानों को पोर्टल पर आवेदन करना होगा। योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को मेरी फसल मेरा ब्योरा पर पंजीकरण करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि योजना के तहत किसानों को अनुदान पहले आओ पहले पाओ के आधार पर ही दिया जाएगा। एक किसान अधिकतम 10 एकड़ क्षेत्र में अनुदान प्राप्त कर सकता है।
अमरूद के लिए है उपयुक्त भूमि! कीनू भी है लाभदायक
डॉ. कमल सैनी कहा कि इस इलाके कि मिट्टी अमरूद की फसल के लिए उपयुक्त साबित हो रही है। अनेक किसान बागवानी फसल की ओर रुख कर रहे हैं। महज दो साल में ही अमरूद के पौधों पर फल लगने लगते हैं और किसानों की आमदनी बढ़ती जाती है। इससे पहले किसान उस जमीन पर अन्य फसलें लगाकर भी अपनी आमदनी कर सकते हैं। किसानों को बाग की लागत के अनुसार अलग अलग अनुदान राशि दी जाएगी। कीनू की फसल के लिए भी यहां की जमीन अच्छे परिणाम दे रही है। धान की फसल में पानी अत्यधिक मात्रा में प्रयोग होता है। इसके लिए भू जल का दोहन भी खूब किया जाता है। ऐसे में बाग लगाना किसानों के लिए फायदे का सौदा होगा।
डॉ कमल सैनी जिला बागवानी अधिकारी ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट की खेती से भी किसान प्रति वर्ष लाखों रुपये का लाभ कमा सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि सरकार ने प्रदेश में ड्रैगन फ्रूट की खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष अनुदान योजना लागू की है। सबसे पहले हरियाणा सरकार ने जमीनी स्तर पर इस योजना को लागू करने की पहल की। हरियाणा ड्रैगन फ्रूट के लिए एक विशेष योजना शुरू करने वाला पहला राज्य बन गया है।
उन्होंने बताया कि ड्रैगन फ्रूट के बाग के लिए 120000 रुपये प्रति एकड़ के अनुदान का प्रावधान किया गया हैए जिसमें पौधा रोपण के लिए 50000 रुपये एवं ट्रैलिसिंग सिस्टम ;जाल प्रणालीद्ध के लिए 70000 रुपये प्रति एकड़ है। इस योजना के तहत एक किसान अधिकतम 10 एकड़ तक अनुदान की सुविधा का लाभ ले सकता है। किसान बागवानी विभाग की वेबसाइट पर आवदेन कर योजना का लाभ ले सकते हैं।
उन्होंने बताया कि बागवानी में मेहनत तो अधिक करनी पड़ती है लेकिन उसके साथ ही आमदनी भी अच्छी हो जाती है। नींबू, मौसमी, अनार, चीकू, एप्पल बेर आदि फसलों के पौधे लगाकर बागवानी से आमदनी में वृद्धि करें। उन्होंने कहा कि मधुमक्खी पालन से ग्रामीण क्षेत्रों में जहां रोजगार का साधन प्राप्त होता है वहीं परागण के माध्यम से फसलों से होने वालो आय और गुणवत्ता में भी वृद्धि होती है साथ ही मधुमक्खी पालन से शहद और मोम जैसे उत्पाद भी प्राप्त होते हैं। मधुमक्खी पालन किसानों के लिए अनुकूल व्यवसाय के रूप में सही है। यह किसानों का कृषि में सहायक होने के साथ ही आमदनी का एक जरिया भी है।
कमल सैनी ने बताया कि किसान मशरूम की खेती करके भी कम लागत में लाखों का मुनाफा कमा सकते हैं। किसान थोड़ी सी जगह में लाखों रुपए का मुनाफा ले सकते हैं। बागवानी विभाग भी मशरूम की खेती को बढ़ावा देने के लिए शिविर लगाकर किसानों को प्रशिक्षित करता है। मशरूम की खेती करने वाले किसानों का भी कहना है कि थोडे़ समय में मशरुम की खेती से सब्जियों के मुकाबले ज्यादा फायदा होता है। किसान संगोष्ठी को प्रगतिशील किसान अनिल राठी, खंड उद्यान विकास अधिकारी डॉ विनोद, अशोक गंगा नगर, जितेन्द्र तितरी के अतिरिक्त फील्डमेन अनिल, राजरुप, अमरपाल, कुलबीर ने भी गहनता से बागवानी फसलें लगाने की विधि बारे विचार सुने। (विज्ञप्ति) इंदु दहिया/ 8053257789

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