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महम का कौन सा मार्ग किस स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर है?जानिए मार्ग नामकरण विवाद की ग्राऊंड रिपोर्ट भी! 24c न्यूज संडे स्टोरी

सात मुख्यमार्गों का नामकरण किया गया था स्वतंत्रता सेनानियों के नामों पर

दो बार नामों से संबंधित बोर्ड भी लग चुके थे
1989 में पालिका ने किया था प्रस्ताव पास
लाला माईदयाल के नाम पर मार्ग के नामकरण से हुआ है ताजा विवाद
महम

महम में इन दिनों लाला माईदयाल नम्बरदार मार्ग का नामकरण विवाद का विषय बना हुआ है। पुराने बस स्टैंड से महम के प्रवेश द्वार से आजाद चौक तक के इस मार्ग का नाम महम के एक जमाने के प्रसिद्ध सेठ लाला माईदयाल नम्बरदार के नाम पर रखा गया है। जबकि इस मार्ग का नाम पहले ही पालिका द्वारा प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी बद्रीप्रसाद काला के नाम पर रखा चुका था। पालिका प्रशासन को यह पता ही नहीं था कि महम के मार्गों के कई मार्गोंं के नाम स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर हैं। 24c न्यूज आज संडे स्टोरी में महम के मार्गों के नाम, नामकरण विवाद की पृष्ठभूमि तथा संबंधित पक्षों के परिजनों से बातचीत आधारित एक ग्राऊंड रिपोर्ट लेकर आया है।
कौन सा मार्ग किस स्वतंत्रता सेनानी ने नाम है
उपलब्ध रिकार्ड कें अनुसार 28 नवंबर 1989 को पालिका में महम के मुख्य मार्गों के नाम स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर रखने का प्रस्ताव रखा गया था। तात्कालीन उपप्रधान जगत सिंह काला के अनुसार यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास हुआ था। पुराने बस स्टैंड से आजाद चौक होते हुए सैमाण रोड बाईपास तक के मार्ग का नाम स्वतंत्रता सेनानी ब्रदीप्रसाद काला मार्ग रखा गया था। अजाद चौक से थाना रोड़ मार्ग का नाम स्वतंत्रता सेनानी झांगीराम मार्ग रखा गया था। इसी प्रकार बाईपास खेड़ी दरवाजा से परस रोहिल्ला से होते हुए मुख्य बाजार तक के मार्ग का नामकरण स्वतंत्रता सेनानी लाला करता राम के नाम पर किया गया था। आजाद चौक से गोयत पाना होते हुए हाईवे तक के मार्ग का नाम स्वतंत्रता सेनानी कबूल सिंह के नाम पर रखा गया था। मोहल्ला खारी कुई से वर्तमान में ब्रह्मकुमारी विश्वविद्यालय के स्थानीय परिसर के पास से होते हुए मुख्य बाजार तक के मार्ग का नाम

लाला रामदास के नाम पर रखा गया था।
श्री गणपत राय की दुकान से डा. चिटकारा के मकान तक के मार्ग का नाम लाला ऐशीलाल मार्ग रखा गया था। इसीप्रकार खानगाह मौहल्ला में बाईपास मोड़ से मेनबाजार को क्रास करते हुए गीताभवन से होते हुए वर्तमान रविदास मंदिर तक के मार्ग का नाम लाला मुंशीरामचरण मार्ग रखा गया था।

लालजी राम गोयत थे प्रधान
19 साल के अतंराल के बाद 1987 में फिर से पालिका चुनाव हुए थे। लालजीराम पालिका के पहले प्रधान बने थे। इसी योजना में स्वतंत्रता सेनानी बद्रीप्रसाद काला के पुत्र जगत सिंह काला पालिका उपप्रधान थे। लालजीराम के पुत्र शिवराज गोयत ने बताया कि पालिका के प्रस्ताव के पारित होने के बाद पालिका की ओर से संबंधित मार्गों के प्रवेश द्वारों पर संबंधित स्वतंत्रता सेनानियो के नामों की बोर्ड लगा दिए गए थे।

पंजाबी सेवा समिति ने किया था नवीनीकरण
लोहे के बोर्डों पर ये नाम अंकित किए गए थे। कुछ समय के बाद देखरेख के अभाव में ये बोर्ड उखड़ गए थे। उसके बाद महम की प्रतिष्ठित समाजसेवी संस्था पंजाबी सेवा समिति ने इन मार्गों पर सिमेंट के बोर्ड बनवा कर उन पर स्वतंत्रता सेनानियों का नाम लिखवाया था। उस समय समिति की ओर से वर्तमान पंजाबी धर्मशाला के पास एक समारोह का आयोजन भी किया गया था।

उसके बाद नहीं ली गई सुध
कुछ समय के बाद ये पंजाबी सेवा समिति द्वारा लगाए गए बोर्ड भी उखड़ गए थे। कई सालों से किसी भी बोर्ड का किसी भी स्थान पर कोई नामों निशान नहीं है। नई पीढ़ी के पालिका पार्षदों का इस ओर ध्यान ही नहीं गया। पालिका का रिकार्ड खंगालना इन्होंने उचित नहंी समझा और ना ही किसी पुराने व्यक्ति से जानकारी ली गई। कद्ाचित यह भी एक कारण रहा कि पालिका प्रस्ताव में स्वतंत्रता सेनानी बद्रीप्रसाद काला के नाम पर रखे गए मार्ग का नामकरण लाला माईदयाल नम्बदार के नाम पर रख दिया गया। लाला माईदयाल के पौत्र विनोद गोयल के अनुसार नाम का नामकरण करने का प्रस्ताव तीन मई को पारित किया गया था।

पुराने बस स्टैड प्रवेश द्वार पर लाला माईदयाल के नामकरण लगा है बोर्ड

दोनों के परिजनों में हैं गहरे पारिवारिक रिश्ते
अच्छी बात यह है कि लाला माईदयाल और स्वतंत्रता सेनानी बद्रीप्रसाद काला के परिजनों मंे अच्छे संबंध हैं। बद्रीप्रसाद काला के पुत्र जगत सिंह काला का कहना है कि उनकी लाला माईदयाल के परिवार से कोई शिकायत नहीं है। वे चाहते हैं कि किसी अन्य उपयुक्त मार्ग का लाला माईदयाल के नाम पर कर दिया जाए, लेकिन स्वतंत्रता सेनानी बद्रीप्रसाद काला के नाम पर मार्ग नामकरण का सम्मान किया जाना चाहिए। पालिका के स्तर पर यह एक बड़ी भूल है, इसे शीघ्र सुधारा जाना चाहिए।
वहीं लाला माईदयाल के पौत्र विनोद गोयल का कहना है कि उन्हें जानकारी नहीं थी कि इस मार्ग का नाम पहले से ही स्वतंत्रता सेनानी बद्रीप्रसाद काला के नाम पर है। यह सब तो पालिका को देखना चाहिए था। उन्होंने कहा कि वे अब भी चाहते हैं कि इस मुद्दे का सर्वमान्य हल निकाला जाना चाहिए। वे बद्रीप्रसाद काला का सम्मान करते हैं। साथ ही ये भी चाहते हैं कि लाला माईदयाल को भी उचित सम्मान मिले।

ये कहना है पालिका सचिव का
पालिका सचिव नरेंद्र सैनी का कहना है कि लाला माईदयाल के नामकरण से ंसबंधित प्रस्ताव पालिका पार्षदों की बैठक में पारित किया गया है। इन दिनों पालिका पार्षदांे का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। नई कार्यकारिणी का गठन नहीं हुआ है। नई कार्यकारिणी का गठन होने के बाद ही इस मुद्दे का हल निकाल दिया जाएगा।24c न्यूज/ इंदु दहिया 8053257789

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