मौत की सजा से भी नहीं घबराया मंत्री

सुना है एक बार किसी राजा ने अपने एक मंत्री को फांसी की सजा सुना दी। मंत्री संगीत प्रेमी था। उस दिन उसके घर मेहमान आए थे। घर में एक आयोजन चल रहा था। सब लोग मस्ती में नाच गा रहे थे। संगीत की महफिल सजी थी।
तभी राजा के सिपाहियों ने आकर उसे सूचना दी कि उसे आज शाम पांच बजे फांसी पर लटका दिया जाएगा। ये राजा का हुक्म है। घर में मातम छा गया। परिवार के लोग रोने लगे। संगीत बंद हो गया, लेकिन वह मंत्री बिल्कुल भी विचलित नहीं हुआ।

उसने कहा शुक्र है राजा ने पांच बजे तक का वक्त दिया। तब तक यह आयोजन पूरा हो जाएगा। अच्छा मौका है आज मैं अपने अंतिम समय में संगीत सुन रहा हूं। संगीत बंद नहीं होना चाहिए। सब लोग नाच गाना जारी रखें। मंत्री पहले से भी खुश था।
उसकी इच्छा को ध्यान में रखते हुए आयोजन पहले की तरह जारी रहा। यह बात राजा तक भी पहुंच गई। राजा बहुत हैरान हुए। वे स्वयं उस आयोजन को देखने आए। उन्हें वैसा ही देखा जैसा उन्हें बताया गया था।
राजा को अपनी भूल का अहसास हो गया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति मौत का भी ऐसे स्वागत करता है। वो कभी अपराध नहीं कर सकता। जरुर उन्हें समझने में कोई भूल हुई है। राजा ने मंत्री को दिया मृत्युदंड वापिस ले लिया।
तभी तो कहा गया मरने से पहले भी क्यूं मरा जाएं, जो भी जीवन मिला है उसे आनंद के साथ व्यतीत करें। 
 

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