Home ब्रेकिंग न्यूज़ महम से निकली 20 किलोमीटर लंबी श्रीखाटू श्याम जी की पदयात्रा

महम से निकली 20 किलोमीटर लंबी श्रीखाटू श्याम जी की पदयात्रा

नाचते गाते श्रद्धालु पहुंचे पुहंचे बहुअकबरपुर स्थित श्रीश्याम जी मंदिर

हारे का सहारा हैं श्रीखाटू श्याम जी
महाबली भीम के पौत्र थे बर्बरीक
बर्बरीक कहलाएं श्रीखाटू श्याम
महम

महम में आज श्रीश्याम भक्तों का जोश देखते ही बनता था। भक्तों का दल महम से लगभग बीस किलोमीटर की पैदल यात्रा कर बहुअकबरपुर स्थित श्रीखाटु जी श्याम मंदिर पहुंचा। पदयात्रा का आयोजन श्रीश्याम सखा मित्र मंडल के सौजन्य से किया गया था।
पदया़त्रा के शुभारंभ के अवसर पर पंचायती रामलीला मैदान महम में सुबह पांच बजे पूजा अर्चना की गई। मुख्य यजमान की भूमिका अजय सिंगला तथा उनकी पत्नी शीला सिंगला तथा पवन रेहल्न तथा उनकी पत्नी ने निभाई।
भक्त पूरे रास्ते नाचते-गाते तथा श्रीश्याम का भजन कीर्तन करते हुए गए। या़़त्रा श्री खाटू श्याम बाबा की प्रतिमा की झांकी के अतिरिक्त श्रीराधा व श्रीकृष्ण की नृत्य करती झांकी भी आकर्षण का केंद्र थी। बहुअकपुर में श्याम भक्तांे ने भंडारे का आयोजन भी किया। यात्रा में मनोज बतरा, अजीत नहरा, सचिन गोयल, रामअवतार बंसल, भारत खट्टर, शिवम बत्रा, रोहित गिरधर, कुनाल गर्ग, सचिन गोयल,  पवन, साहिल गर्ग, दीपू रेहलन, प्रवीण अरोडा, गणेश, मुन्ना, मयंक गर्ग व बिल्लू मलिक आदि शामिल थे।


हारे का सहारा हैं श्रीखाटू श्याम-जानिए इतिहास
श्रीखाटू श्याम के बारे में मान्यता है कि वे ’हारे का सहारा’ बनते हैं। पौराणिक प्रसंगों के अनुसार भीम पु़त्र घटोत्कच का एक अति बलशाली पुत्र हुआ बर्बरीक। जब महाभारत का युद्ध शुरु हुआ तो बर्बरीक ने भी अपनी माता कामकंटका से य युद्धमें जाने की आज्ञा मांगी तथा पूछा कि वे किस ओर से युद्धमंे भाग लें? बर्बरीक की मां ने उससे कहां, ’बेटा हारे का सहारा बनाना’। बर्बरीक के पास वरदान में मिले तीन बाण थे। इन बाणों से वे किसी भी युद्ध को जीतने की क्षमता रखते थे। भगवान श्रीकृष्ण जानते थे कि हारते हुए कौरवों की तरफ बर्बरीक हो गया तो पांडवों की हार निश्चित है।


श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण का भेष धारण करके रास्ते में ही बर्बरीक को रोक लिया। बर्बरीक से श्रीकृष्ण ने उसका शीश मांग लिया। बर्बरीक ने खुशी खुशी अपना शीश श्रीकृष्ण को अर्पित कर दिया। श्रीकृष्ण ने बर्बरीक के शीश एक निश्चित स्थान पर रख दिया। उन्होंने वहीं से अपने कटे शीश से ही महाभारत का पूरा युद्ध देखा। साथ ही श्रीकृष्ण ने बर्बरीक की भक्ति से खुश होकर उन्हे वरदान दिया कि कलयुग में श्रीश्याम के रूप में उनकी पूजा होगी। भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को अपने विराट स्वरूप के दर्शन भी करवाए। कहते हैं जहां महाभारत के युद्ध के दौरान बर्बरीक का शीश रखा गया था, वहीं पर सीकर राजस्थान में श्रीखाटू श्याम जी का मंदिर स्थापित है। जहां लाखों की संख्या में भक्त दर्शनों को जाते हैं।

आसपास की न्यूज के बारे में तुरंत जानने के लिए डाऊन लोड़ करे 24सी ऐप नीचे दिए लिंक से

Link: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.haryana.cnews

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

निंदाना में लगे भंडारे में पहुँचे आम आदमी पार्टी के नेता

टीन शेड का हुआ उद्घाटन महम, 4 फरवरी महम के निंदाना गांव में दादा डहरी वाला मंदिर में विशाल...

रविदास जयंती पर निकाली शोभायात्रा

गांव भैणी सुरजन में हुआ आयोजन महम, 4 फरवरी गांव भैणी सुरजन में संत शिरोमणि गुरु रविदास जी महाराज...

पुत्रियों पर पिता की हत्या का आरोप, 26 जनवरी को हुई थी भैणीमातो के कर्मबीर की मौत

मृतक के भाई के बयान पर हुआ मामला दर्ज महम, 4 फरवरीगांव भैणीमातो के कर्मबीर की मौत के मामले...

स्वामी सत्यपति परिव्राजक की पुण्यतिथि पर फरमाणा होगा कार्यक्रम

आर्य सन्यासी स्वामी मुक्तिवेश रहेंगे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित महम, 4 फरवरी स्वामी सत्यपति परिव्राजक की पुण्यतिथि...

Recent Comments

error: Content is protected !!