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38 साल पहले महम में शुरु हुई थी एक रामलीला, जो इस बार नहीं हो पाई!कौन थे इसके पहले प्रधान? कहां आरंभ हुई थी ये रामलीला? क्यों नहीं हो पाई इस बार ये रामलीला? देखिए एक दूलर्भ फोटो भी?

प्रेम सेवा समिति की एक शाखा के रूप में स्थापित हुई थी सनातन धर्म रामलीला

खांड की मंडी मंदिर के सामने होती है यह रामलीला
महम

गत कई वर्षों से महम में तीन रामलीलाएं होती थी। इस बार दो रामलीला हुई हैं। एक पंचायती रामलीला और दूसरी आदर्श रामलीला। तीसरी रामलीला सनातन धर्म रामलीला इस वर्ष नहीं हो पाई। सनातन धर्म रामलीला का इतिहास भी पुराना है। 38 साल पहले आरंभ हुई यह रामलीला खांड की मंडी मंदिर के सामने मैदान में होती है।
1983 में आरंभ हुई थी सनातन धर्म रामलीला
सनातन धर्म रामलीला 1983 में आरंभ हुई थी। उस समय यह रामलीला उस समय की प्रतिष्ठित समाजसेवी संस्था प्रेम सेवा समिति की शाखा के रूप में आरंभ हुई थी। इस रामलीला क्लब का पहला फीता जगत ंिसह काला ने काटा था साथ ही उन्होंने रामलीला का संचालन भी किया था।
जगत सिंह काला ने बताया कि 1983 में इस रामलीला के संस्थापक प्रधान चंद्रभान कश्यप बने थे। 1984 व 1985 में जगत सिंह काला रामलीला के प्रधान रहे।
पंचायती रामलीला से आए थे कई कलाकार
सनातन धर्म रामलीला में कई कलाकार पंचायती रामलीला से आए थे। यह रामलीला पंचायती रामलीला के लगभग पीछे ही होती है। दोनों रामलीलाओं की आवाज भी आपस में टकराती है।

ये है दुलर्भ फोटो

कौन हैं इस फोटो में?
जगत सिंह काला ने इस रामलीला का एक दुलर्भ फोटो उपलब्ध करवाया है। यह फोटो 1984 का रामलीला के शुभारंभ का है। तब रामलीला का शुभारंभ खांड की मंडी के तात्कालीन पुजारी पंडित खुशीराम ने किया था। पंडित खुशीराम को महम के इतिहास पुरुषों में से एक माना जाता है। इस फोटो में फीता काट रहे पंडित खुशीराम हैं। इनके पीछे रामलीला में भीम का किरदार निभाने वाले इनके ही पौत्र भीम सिंह हैं। इसके अतिरिक्त फोटो में रामलीला समिति के सदस्य सत्यनारायण रोहिल्ला, केकई की भूमिका निभाने वाले बृजमोहन उर्फ बंदू, लक्ष्मण की भूमिका निभाने वाले बजरंग गर्ग, प्रधान जगत सिंह काला, उपप्रधान श्याम लाल गुप्ता तथा उवर्शी की भूमिका निभाने वाले सुभाष वर्मा हैं।
फिर से करेंगे रामलीला का मंचन-वर्तमान प्रधान
सनातन धर्म रामलीला के वर्तमान प्रधान अजमेर सिंहमार ने कहा कि इस वर्ष कोरोना की वजह से रामलीला होने या ना होने पर संशय बना रहा। इसके अतिरिक्त रामलीला के कलाकारों की भी कमी हो गई थी। अजमेर सिंहमार का कहना है कि आगामी वर्षों में खास योजना व अंदाज में फिर से रामलीला के मंचन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अपने आयोजन के आरंभ होने के बाद से अब तक केवल चार बार यह रामलीला नहीं हो पाई थी। गत वर्ष कारोना की वजह से तथा कुछ साल पहले तीन साल तक महम की सभी रामलीलाएं नहीं हो पाई थी। सिंहमार ने बताया कि अब यह रामलीला क्लब स्वतंत्र रूप से एक पंजीकृत संस्था है। यह संस्था रामलीला के साथ रक्तदान तथा अन्य सामाजिक गतिविधियों का संचालन भी करती है। इंदु दहिया 24c न्यूज/ 8053257789

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