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हरियाणा में कहां है एमडीएच किंग धर्मपाल महाशय की मां के नाम पर गुरुकुल?

जानिए धर्मपाल महाशय के बारे में दुलर्भ जानकारियां

वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र कटारिया से 24c से विशेष साक्षात्कार
रोहतक के दयानंद मठ में कई बार दिया है योगदान
आर्यसमाज के भामाशाह थे धर्मपाल महाशय
स्वामी दयानंद के निवास स्थान को बनवाया संग्रहालय

24c न्यूज की तरफ से मसाला किंग को श्रद्धांजलि

रोहतक
अपने जीवनकाल में संघर्ष की अनोखी दास्तां के अतुलनीय नायक बन चुके एमडीएच वाले धर्मपाल महाशय नहीं रहें। 24c न्यूज, 98 साल की आयु तक पूर्ण स्वस्थ्य जीवन जीने वाले धर्मपाल महाशय के जीवन से जुड़े कुछ विशेष पहलुओं से अवगत करवा रहा है।
वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र कटारिया उनसे कई बार, कई मौकों पर मिले हैं। नरेंद्र कटारिया गुरु कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार की प्रबंधन समिति के सदस्य भी हैं। इसके अतिरिक्त वे आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा के सलाहकार है तथा गुरुकुल इंद्रप्रस्थ फरीदाबाद के स्वामी श्रद्धानंद ग्लोबल स्कूल की प्रबंधन समिति के प्रधान भी हैं। नरेंद्र कटारिया ने बताया कि धर्मपाल महाशय आर्यसमाज के भामाशाह थे। आर्य समाज के प्रति उनका योगदान अतलुनीय था।

ऐसे शुरु हुई थी मसालों की ‘शुद्धता’ की यात्रा
नरेंद्र कटारिया ने बताया कि शुरुआत में उनकी मसाले की एक छोटी थी हट्टी अर्थात दुकान थी। जिसे महाशय दी हट्टी कहा जाता था। एक बार एक ग्राहक ने उनके मसालों में मिलावट की शिकायत कर दी। महाशय जी को बुरा लगने की बजाय, वे ग्राहक की शिकायत की गहराई में गए। पता चला कि ग्राहक की शिकायत जायज थी। चक्की वाले ने मुनाफे का हवाला देकर मिलावट की बात को जायज ठहराने की कोशिस की, लेकिन उन्होंने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। तभी से उन्होंने केवल अपनी ही चक्की के पिसे मसाले बेचना शुुरु किया और अपनी देखरेख में और चक्कियां लगवाई। पहले आसपास के दुकानदारों ने उनसे मसाले लेने शुरु किए। फिर दूसरे राज्यों में उनके मसाले जाने लगे। और फिर पूरी दुनिया उनके मसालों की कद्रदान हो गई। किसी भी कीमत पर शुद्धता के साथ समझौता नहीं किया और वे ‘शुद्धता’ की पहचान बन गए। महाशय दी हट्टी एमडीएच ब्रांड बनी दुनिया जानती है कि धर्मपाल महाशय ने तांगे से अपनी यात्रा शुरु की थी और फिर जहाजों तक मालिक बन गए।

माता चनन देवी कन्या गुरुकुल पिल्लू खेड़ा में धर्मपाल महाशय जी

पिल्लू खेड़ा में है महाशय की मां के नाम पर गुरुकुल
पिल्लू खेड़ा मंडी जींद में महाशय धर्मपाल की मां चनन देवी के नाम पर कन्या गुरुकुल है। इस गुरुकुल का निर्माण महाशय जी ने ही करवाया था। समय-समय पर इस इस गुरुकुल के लिए वे अपना योगदान देते रहे।
दयानंद मठ रोहतक में देते थे दान
दयानंद मठ रोहतक में धर्मपाल महाशय अक्सर आते थे। वे हर बार मठ के रखरखाव व वेद प्रचार के लिए कई-कई लाख रुपए का योगदान देकर जाते थे। इंद्रप्रस्थ गुरुकुल फरीदाबाद में स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान दिवस पर वे अक्सर आते थे और लाखों रुपए का योगदान यहां भी देते थे।

दयानंद मठ रोहतक में धर्मपाल महाशय जी

स्वामी दयानंद के निवास स्थान को बनाया संग्राहलय
धर्मपाल महाशय ने अजमेर में स्वामी दयानंद जी के निवास स्थान को न केवल भव्य रूप देने में योगदान दिया बल्कि यहां संग्राहलय भी बनवाया। इसके अतिरिक्त जहां स्वामी दयानंद ने प्रेस स्थापित की थी वहां गौशाला बनवाने में भी योगदान दिया। गुरुकुल कांगड़ी की फार्मेसी को भी उन्होंने आधुनिक बनाने तथा उसे सुचारु करने में करने में अह्म भूमिका निभाई। हरियाणा में पंचकुला के पास बने वेद शोध संस्थान के लिए उन्होंने कई करोड़ रुपए के योगदान दिया है।
अंतराष्ट्रीय आर्य समाज सम्मेलन के आर्थिक सूत्रधार थे
नरेंद्र कटारिया ने बताया कि 25 से 28 अक्टूबर 2018 को दिल्ली में हुए अंतराष्ट्रीय आर्य समाज सम्मेलन के आयोजन में धर्मपाल महाशय का बड़ा योगदान था। इस आयोजन की केंद्रीय भूमिका में वर्तमान में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत जी थे।
लिए थे दो संकल्प
कटारिया ने बताया कि वे महाशय जी से एक बार गुरुकुल इंद्रप्रस्थ में हुई एक मुलाकात में महाशय जी ने उनसे दो संकल्प लिए थे। एक तो कहा था कि वे कभी भी अपने सिद्धांतों से समझौता ना करें तथा दूसरा किसी भी स्थिति में आर्यसमाज के केसों की पैरवी करना ना छोड़े। वे इन संकल्पों को पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं।

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