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जिंदादिल अंदाज की ’जिंदा’ मिसाल थे प्रधान लालजी राम गोयत- ’महम जिन्हें करता है याद’! 24c न्यूज विशेष

मजाल क्या उनका कपड़ा कभी हल्का सा मैला भी दिखा हो!

शान से लहराता साफा और हाथ में छतरी थी पहचान
कड़क आवाज, साफ कहना और हमेशा से खुश रहना ही था जीवन का दर्शन
1987 से 1991 तक रहे महम नगरपालिका के प्रधान
महम

जन्म और फिर मृत्यु अटल सत्य है। मृत्यु के बाद भी जीवन की चर्चा होना जीवन के सार्थक होने की गवाही होती है। कुछ जीवन ऐसे होते हैं जिनके जीने का अंदाज, काम करने के तरीके और समाज को उनकी देन, उन्हें जीवन के बाद भी पहचान देते हैं। ऐसे एक व्यक्ति थे नई योजना में महम नगरपालिका के पहले प्रधान लालजी राम गोयत।
उनका साफा बांधने का लाजवाब अंदाज, खास रौबीली चाल और हाथ में छतरी आज तक भी उन्हें महम के किसी भी अन्य व्यक्ति से अलग करती है। उनकी खास बात ये थी कि वे जो कहते थे, करते थे। ऐसे साफ सूथरे रहते थे कि मजाल क्या? कहीं धूल भी लग जाए। भगवान ने उन्हें शरीर भी लंबा तगड़ा और गठीला दिया था। उन्हें शायद की कभी किसी ने गुस्से में या दुःखी देखा हो। वे हमेशा खुश ही रहते थे। उनका जन्म 1925 में महम के सेढ़ा सिंह गोयत के घर हुआ था। पिता किसान थे।

पूर्व उपप्रधानमंत्री चै. देवीलाल के साथ लालजी राम गोयत (फाइल फोटो)

पालिका प्रधान के अतिरिक्त अन्य पदों पर भी रहे
1968 में नगरपालिकाओं के चुनावों को बंद कर दिया गया था। 1987 में फिर से पालिका चुनाव कराए गए। इन चुनावों के बाद पार्षदांे ने लालजी राम गोयत को पालिका का प्रधान चुना था। उस समय महम नगरपालिका में 13 पार्षद थे। उन्हें नौ पार्षदों का समर्थन मिला था। इसके अतिरिक्त लालजी राम 27 अप्रैल 1949 से 10 जुलाई 1964 तक आर्मड करोप्स पूना होर्स में भी तैनात रहे। वे जिला सैनिक बोर्ड के सदस्य भी रहे। दो बार पालिका पार्षद रहे। इसके अतिरिक्त दी रोहतक सैन्ट्रल कोओपरेटिव बैंक के निदेशक भी रहे।
प्रगतिशील किसान के रूप में बनाई पहचान
लालजी राम के पिता सेढ़ा सिंह गोयत किसान थे। लालजी राम के बड़े बेटे शिवराज गोयत बताते हैं कि बचपन में लालजी राम ने बहुत संघर्ष किया। लेकिन शीघ्र ही वे उन्नत खेती की तकनीकों को समझ गए। नहरी पानी की कमी को उन्होंने ट्यूबवैल लगवाकर पूरा किया। बीज और खाद के लिए सीधे हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय से संपर्क किया। उच्च स्तरीय कृषि औजार भी लिए। एक समय वे महम के सबसे प्रगतिशील किसान माने जाते थे।
गजब का सेवाभाव रखते थे
लालजी राम के बारे में कहा जाता है कि वे मेहमानों को खाना खिलाने में बहुत आनंद महसूस करते थे। उनके कई ऐसे किस्से हैं जब उन्होंने अचानक काफी संख्या में आए लोगों के लिए खाने व रहने का प्रबंध किया।

लालजी राम का परिवार (फाइल फोटो)

शिक्षा के जबरदस्त पक्षधर थे
लालजी राम गोयत शिक्षा के जबरदस्त पक्षधर थे। उनके शिवराज गोयत बैंक मैनेजर के पद से तथा हरदीप गोयत सेल्ज टैक्स इन्सपैक्टर के पद से सेवानिवृत हैं। बेटी बिमला भी शिक्षित थी और उसका परिवार भी उच्चस्तरीय शिक्षा प्राप्त है। यहां तक कि उन्होंने अपनी पुत्र वधुओं सरोजबाला व संतरा देवी को भी शादी के बाद और आगे पढ़ने के लिए प्रेरित किया। पुत्र वधुओं को पढ़ने के लिए पेे्ररित करने में लालजी राम की पत्नी शांति देवी की भी सहरानीय भूमिका रही। लालजी राम की शिक्षित सोच का ही परिणाम है कि लालजी के पौत्र गोयत एमबीए, इंजीनियर, लाॅ ग्रजुऐट तथा पौत्री पीजीआईएम रोहतक में एमडी डाक्टर है।
खूब मिली थी ग्रांट
लालजी राम गोयत के समय में महम नगरपालिका को खूब ग्रांट मिली थी। महम के मेनबाजार को सिमेंटिड पक्का उसी समय किया गया था। महम जलघर में भी एक टैंक उस समय में बना था। इसके अतिरिक्त भी काफी विकास कार्य हुए थे। उन्होंने पक्ष व विपक्ष का भेदभाव किए बिना विकास कार्य करवाए थे। 28 दिसंबर 2018 को उनका निधन हो गया था।24c न्यूज/ इंदु दहिया 8053257789

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