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महम के किस गांव में हैं 183 साल पुराना शिव मंदिर, आज भी मानता है पूरा गांव! मौजूद हैं प्राचीन मूर्तियां! किसने बनवाया था ये मंदिर? पढ़िए 24c संडे स्टोरी

सेठ हीरालाल ने विक्रम संवत् 1895 में बनवाया था फरमाणा का शिव मंदिर

11 साल पहले फिर से किया गया हैं मंदिर का जीणोद्धार
गांव फरमाणा के साथ-साथ महम इलाके की ऐतिहासिक धरोहर है ये मंदिर
इंदु दहिया

महम चौबीसी का गांव फरमाणा अपने अंदर अति समृद्ध ऐतिहासिक व सांस्कृतिक विरासत समेटे हुए है। गांव की हर गली में इतिहास के अनेक महत्वपूर्ण व रूचिकर तथ्य छिपे हुए हैं। फरमाणा खास में स्थित गांव का शिव मंदिर भी न केवल गांव की बल्कि पूरे इलाके व प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर है।
इस मंदिर पर लिखा हुआ है कि यह मंदिर विक्रम संवत् 1895 में बनवाया गया था। वर्तमान में विक्रम संवत् 2078 है। साफ है कि यह मंदिर आज से लगभग 183 साल पहले निर्मित किया गया था।

मंदिर में स्थित श्रीराम दरबार तथा अन्य मूर्तियां

सबसे पुराना शिव मंदिर माना जाता है
इस मंदिर के पुजारी नवीन शर्मा ने बताया कि इस मंदिर के बारे में बताया जाता है कि यह मंदिर इस इलाके में सबसे प्राचीन ग्रामीण शिव मंदिर है। इस मंदिर के प्रति आरंभ से ही ग्रामीणों की भारी आस्था रही है। अधिकतर ग्रामीण इस मंदिर में पूजा अर्जना के लिए आते हैं। मन्नतें मांगते हैं। मंदिर में शिव नारायण तथा माता दुर्गा की मूर्तियां प्रचीन हैं। श्रीराम दरबार की प्रतिमा बाद में लाई गई है।

मंदिर में स्थित शिव नारायण की प्राचीन मूर्ति

सेठ हीरालाल ने बनवाया था मंदिर
इस मंदिर का निर्माण इस इलाके के अति प्रसिद्ध सेठ हीरालाल ने करवाया था। हीरालाल ने ही फरमाणा गांव में एक कुए का निर्माण करवाया था। मंदिर के पास ही बने इस कुए पर आठ भौण एक साथ चलते थे। इस कुए को भी प्रदेश के सबसे सुंदर कुओं में से एक माना जाता है। 24c न्यूज इस कुए पर एक विस्तृत न्यूज पोस्ट कर चुका है।
पुजारी नवीन शर्मा ने बताया कि फिहलाल इस मंदिर की देखभाल सेठ हीरालाल ट्रस्ट द्वारा ही जा रही है। इस मंदिर पर सेठ हीरालाल का नाम भी लिखा हुआ है।

गहरी मान्यता है मंदिर के शिवालय की

शिवालय की है विशेष मान्यता
वैसे तो मंदिर में रामदरबार, गणेश जी, माता दुर्गा तथा शिव नारायण की प्रतिमाएं हैं। लेकिन मंदिर में शिवालय की विशेष मान्यता है। सोमवार व भगवान शिव से संबंधित अन्य अवसरों पर काफी संख्या में ग्रामीण इस शिवालय पर जलाभिषेक के लिए आते हैं। यह मंदिर ग्रामीणों की भक्ति भावना का एक बड़ा केंद्र है।

सेठ हीरालाल का वंशावली वृक्ष

सेठ हीरालाल परिवार के लिए है आस्था का केंद्र
सेठ हीरालाल की आने वाली पीढियों के परिवार गांव छोड़कर जा चुके हैं। देश-विदेश में कई स्थानों पर इनका परिवार आबाद है। सेठ हीरालाल की पीढ़ी के दिल्ली निवासी रामबाबू सिंगला ने बताया कि उनके लिए यह मंदिर गहरी आस्था का केंद्र है। वे जब भी संभव होता है, वे यहां आते हैं। मंदिर के रखरखाव व पुजारी की व्यवस्था करते हैं। आगे भी मंदिर में जैसी भी जरूरत होगी व्यवस्था की जाएगी। इंदु दहिया/24c न्यूज /8053257789

पुजारी नवीन शर्मा

सौजन्य से

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