कृष्ण खरकड़ा (फाइल फोटो)

खरकड़ा का पूर्व सरपंच तथा महम चौबीसी का सच्चा पंचायती था कृष्ण अहलावत

महम
लगता है महामारी पूरे देश के साथ-साथ महम चौबीसी को भी बडे़ घाव देकर जाएगी। पिछले दिनों महम ने कई ऐसे व्यक्ति खोए हैं, जिनकी कमी आने वाले कई वर्षों तक पूरी नहीं होगी। बुधवार को भी चौबीसी ने एक ऐसा पंचायती योद्धा खो दिया, जो झूठ के सामने कभी नहीं झूका। पंचायत में हमेशा सच्चाई का ही साथ दिया। यही कारण था कि खरकड़ा के कृष्ण अहलावत के बिना इन दिनों शायद ही कोई बड़ा सामाजिक विवाद निपट पाता था।
खूब लड़े मौत से
खरकड़ा की छाज्याण पंचायत के वर्ष 2005 से 2010 तक सरपंच रहे लगभग 64 वर्षीय कृष्ण खरकड़ा कुछ दिन पहले कोरोना से संक्रमित हो गए थे। कृष्ण खरकड़ा के लगभग हमेशा साथ रहने वाले उनके अति घनिष्ठ मित्र अशोक नंबरदार ने बताया कि इस पंचायती योद्धा ने कोरोना को तो हरा दिया था, लेकिन फिर उन्हें ब्लैक फंगस हो गई। ब्लैक फंगस से भी वे लगभग जंग जीत गए थे। उनका आप्रेशन भी हो गया था।
इस बीच उन्हें हर्ट अटैक आ गया। हर्ट अटैक का भी एक झटका झेल गए थे। लेकिन दूसरा झटका उन पर भारी पड़ा वे जिंदगी की जंग हार गए।उनका रोहतक के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था।

पंचायत को संबोधित करते कृष्ण खरकड़ा(फाइल फोटो)

भाई की नहीं न्याय की कहते थे
कृष्ण खरकड़ा के बारे में एक बात चर्चित थी कि वे अपने भाई की नहीं न्याय की बात कहते हैं। अगर सत्य बात यदि उनके भाई के खिलाफ भी जाती तो वे उसे कहते थे। अक्सर जब पंचायत में बोलते थे तो उन्हें ध्यान से सुना जाता है। वे एक-एक बात पूरे तथ्यों के साथ कहते थे।
कई बार ऐसा हुआ है कि वे किसी एक पक्ष के साथ पंचायत में गए, लेकिन उनका फैंसला उसी पक्ष खिलाफ भी हो जाता था। उनका कहना था कि आए चाहे किसी के साथ हों पंचायत में केवल सत्य की तरफ ही होंगे। जिनके साथ आए हैं अगर वो पक्षकार गलत है तो उसे गलत ही कहा जाएगा।

गांव के ही ब्रिगेडियर प्रकाश चैधरी के साथ कृष्ण खरकड़ा फाइल फोटो

दो बेटों का परिवार छोड़ कर गए हैं
कृष्ण खरकड़ा अपने पीछे पत्नी राजबाला के अतिरिक्त बेटे पवन कुमार तथा अश्वनी छोड़ कर गए हैं। दोनो बेटे विवाहित हैं। एक पौत्र तथा एक पौत्री भी है। सामाजिक पंचायतों में कृष्ण खरकड़ा की कमी हमेशा महसूस की जाएगी।24c न्यूज/ इंदू दहिया 8053257789

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One thought on “झूठ को हमेशा पराजित करने वाला हार गया जिंदगी की जंग, नहीं रहे कृष्ण खरकड़ा”

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