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कैम, कैर, कैंदू, जाल अब भी हैं यहां, आज के समय में दुर्लभ हैं ये वृक्ष! महम चौबीसी की धरोहर है ये स्थल! किसने छोड़ा था? कहां है और अब किस हालात में है यह स्थल? पढ़िए 24c संडे स्टोरी

फरमाणा गांव के इस प्राकृतिक व सुरम्यी स्थल बास्ती आला को सहेजने की जरूरत है

इन दिनों भरा है बारिश का पानी, ऐतिहासिक तालाब भी है अनदेखी का शिकार
महर्षि दयानंद के आदर्शों से प्रभावित होकर आर्य समाज साधना आरंभ की थी बास्तीराम ने
इंदु दहिया

आज जब चारों ओर कंकरीट के फर्श और दीवारें बन रही हैं। वन, जंगल इतिहास बनते जा रहे हैं। प्राचीन वृक्ष अब बस किताबों और कविताओं में ही दिखते हैं। लेकिन महम चौबीसी के गांव फरमाणा के उत्तर में एक ऐसा स्थल है, जहां आज भी कई दुर्लभ वृक्ष देखे जा सकते हैं। बास्तीवाले तालाब परिसर के इस स्थल पर इन दिनों बारिश का पानी जमा है। वैसे भी यह स्थल अनदेखी का शिकार दिख रहा है। अगर इस स्थल का संरक्षण हो जाए तो यह चौबीसी का अभ्यारण हो सकता है।
बास्ती पंडित की देन है यह स्थल
यह स्थल गांव को बास्ती पंडित की देन है। लगभग पौने दो सौ साल पहले फरमाणा में बास्ती पंडित हुए। उन्होंने अपने हिस्से की खेतीहर जमीन तालाब व वृक्षों के लिए छोड़ दी। बास्ती राम आजीवन अविवाहित रहे। पूरा जीवन साधना व आर्यसमाज को समर्पित किया। यह स्थल लगभग 22 एकड़ में फैला है।

नीम्बर भी देखा जा सकता है बास्ती वाला प

बास्तीराम ने खो दी थी आंखे
बास्ती राम की आठवीं पीढ़ी के समे शर्मा ने बताया कि बास्ती राम महर्षि दयानंद द्वारा बताई गई साधना करते थे। एक बार वह सूर्य की ओर एकटक देखते ही रहे। वो इस साधना में इतने प्रवीण नहीं हुए थे, इसके बावजूद उन्होंने सूर्य की ओर से अपनी आंखे नहीं हटाई। सूर्य के तेज प्रभाव के कारण उनकी आंखों की रोशनी चली गई। यह रोशनी बाद में कभी वापिस नहीं लौटी।

बास्ती वाला पर आज भी खड़ा है कैम का पेड़

ये पेड़ देखे जा सकते हैं
बास्ती वाला में आज भी कैम, कैर, कैंदू,, लेहसुआ, नीम्बर तथा जाल के वृक्ष देखे जा सकते हैं। ये सभी वृक्ष अब दुलर्भ हैं। इसके अतिरिक्त अन्य वृक्ष भी यहां हैं। कई दुर्लभ वृक्ष तो बहुत अच्छी हालात में हैं। बदलते वातावरण से जमकर संघर्ष कर रहे हैं।

कैरों पर अब भी लगते हैं टींड यहां

ऐतिहासिक अखाड़ा है इस स्थल पर
बास्ती वाला तालाब पर फरमाणा का ऐतिहासिक अखाड़ा भी है। गांव का सबसे पुराना खेल मैदान। ग्रामीण कहते हैं कि इस स्थल पर अभ्यास कर गांव के कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाया है। यहां एक कुई है जिसका पानी भी बहुत अच्छा माना जाता है। हालांकि इन दिनों पूरे परिसर के साथ-साथ यह कुई भी बारिश के पानी में डूबी हुई है। इस स्थल की ओर ध्यान दिए जाने की जरूरत है।
युवा करते हैं अभ्यास
बास्तीवाला परिसर में इन दिनों युवाओं ने भी एक खेल का मैदान बना रखा है। इस दिशा में पहले रोड़ पर युवा अभ्यास करते थे। अब इस मैदान पर अभ्यास करते हैं। तीन सौ मीटर से अधिक का एक रेस टैªक है। हरियाणा स्टाइल कबड्डी के दो मैदान बने है। इसके अतिरिक्त अभ्यास का अन्य सुविधा भी है। यहां खेल मैदान बनाने में समाजसेवी महाबीर फरमाणा ने गांव के युवाओं की मदद की है।

समे शर्मा

समे शर्मा कर रहे हैं देखरेख
फिलहाल बस्तीवाला स्थल की देखेरख बास्ती पंडित की पीढ़ी के ही समे शर्मा कर रहे हैं। समे शर्मा अविवाहित है। समे न केवल प्राचीन वृ़क्षों की देखभाल कर रहे हैं, बल्कि नए वृ़क्ष भी रोप रहे हैं। समे इस स्थल पर नुकसान पहुंचाने वालों को रोकते भी हैं।
इन दिनों तो यहां पानी भरा है। कुछ दिनों बाद दुलर्भ वृक्ष देखने वालों तथा प्रकृति प्रेमियों की पसंद का हो सकता है यह स्थल। इस स्थल को महम इलाके की धरोहर कहा जा सकता है। 24c न्यूज /8053257789

सौजन्य से

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