Home जीवनमंत्र पिता की सीख- आज का जीवनमंत्र 24c

पिता की सीख- आज का जीवनमंत्र 24c

परिस्थितियाँ चाहें जितनी भी विषम हाें, उनका डटकर सामना करना चाहिये!

एक लड़की अपने जीवन की समस्याओं से दु:खी थी। एक दिन दु:खी होकर वह अपने पिता के पास गई और कहने लगी, “पापा! क्या मुझे अपनी ज़िंदगी में परेशानियों से कभी छुटकारा नहीं मिलेगा। मैं तंग आ चुकी हूँ इन रोज़-रोज़ की परेशानियों से।”

उत्तर देने के स्थान पर लड़की का पिता उसे किचन में ले गया।  उसने अलग-अलग बरतन में आलू, अण्डे और कॉफ़ी बीन्स डाले। फिर गैस बर्नर ऑन कर उन्हें उबलने के लिए रख दिया। लगभग आधे घंटे बाद पिता ने गैस बर्नर बंद कर दिया। फिर तपेली में से आलू निकालकर उसे एक कटोरी में और अंडे को एक प्लेट में रख दिया। कॉफ़ी उसने एक कप में निकाल ली।फिर उसने अपनी बेटी से पूछा, “अब बताओ तुम्हें क्या दिख रहा है?” लड़की बोली, “आलू, अंडा और कॉफ़ी।”

“ज़रा ठीक से देखकर बताओ?” पिता ने फिर से पूछा।लड़की ने फिर से वही उत्तर दिया। तब पिता ने उससे कहा कि वह इन चीज़ों को छूकर इस प्रश्न का उत्तर दे।

लड़की ने सबसे पहले आलू को छुआ, वह सख़्त था। फिर उसने अंडे को छुआ, वह कठोर हो चुका था । इसके बाद जब उसने गर्म-गर्म कॉफ़ी पी, तो उसके स्वाद से उसका दिलोदिमाग़ तरो-ताज़ा हो गया।

लेकिन उसे इन सबका मतलब अब भी समझ नहीं आया था। वह पूछ बैठी, “पापा! इसका अर्थ क्या है?”
पिता ने कहना शुरू किया, “तुमने ध्यान दिया होगा कि पहले आलू सख़्त था, लेकिन उबालने के बाद वह नरम पड़ गया। वहीं नर्म और कमज़ोर अंडा सख़्त हो गया। उधर कॉफ़ी बीन्स पानी के साथ इस तरह घुल गई कि उसने एक नई स्वाद भरी चीज़ बना दी। तीनों एक ही परिस्थिति से गुज़रे, लेकिन सबका व्यवहार अलग था और परिणाम भी। अब तुम बताओ कि तुम क्या हो – आलू, अंडा या कॉफ़ी?”

लड़की को पिता की बात समझ आ गई। उसे समझ आ गया कि जीवन में परेशानी और समस्याएँ तो आयेंगी ही। इन्हें आने से रोका नहीं जा सकता। इनका हम पर क्या प्रभाव पड़ेगा, ये इस बात पर निर्भर करता है कि हम ऐसी परिस्थितियों का सामना कैसे करते हैं? हम आलू की तरह नर्म पड़ जाते हैं, अंडे की तरह सख़्त हो जाते हैं या फिर कॉफी की तरह विषम परिस्थितियों का सामना कर उनमें ढल कर उन्हें ही बदल देते है।

दोस्तों, जीवन की विषम परिस्थितियों के समक्ष हमें कमज़ोर नहीं पड़ना चाहिए, न ही उनके प्रभाव में जीवन के प्रति सख़्त रवैया अपनाना चाहिए। बल्कि हमें कॉफ़ी बीन्स की तरह उन परिस्थितियों के भीतर जाकर उनका इस तरह सामना करना चाहिए कि वे परिस्थितियां ही बदल जाएँ।

आपका दिन शुभ हो!!!!!

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