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हौंसले और हिम्मत की चौंका देने वाली हकीकत-24c न्यूज की एवरेस्ट विजेता मनीषा पायल से मुलाकात-संडे स्पेशल

बाइक वाली के नाम से मशहूर मनीषा की जिद्द के सामने झूक जाती हैं पर्वतों की चोटियां

मौत से कई बार हुआ सीधा सामना
अब और पहाड़ों पर जाने का रखती है इरादा

 उसे खतरों से डर नहीं लगता, ऊंची बर्फीली चोटियों से झांकता सूरज उसे लुभाता है। माऊंट एवरेस्ट का बर्फीला तूफान उसे डरा नहीं पाया। बर्फ की दीवारों से वो घबराई नहीं। पहाड़ पर चढ़ना उसका शौक हैं। कई बार मौत से सीधा सामना हुआ। पर्वतारोहियों की लाशों से मुलाकात हुई। हर बार मौत ही उससे हारी है।
उसका सफर जारी है। कहती है अभी तो शुरुआत है। बहुत कुछ करना बाकी है।
आइए आज 24 सी न्यूज आपको मिलवाता है, दुनिया की सबसे ऊंची चोटी फतेह कर चुकी हरियाणा की बेटी मनीषा पायल से।
विश्वविद्यालय की पढ़ाई के दौरान बाइक वाली के नाम से मशहूर मनीषा ने 22 मई 2019 को एवरेस्ट फतेह किया था। इससे पूर्व 26 जनवरी को 2019 को ही दक्षिण अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी किलीमंजारों पर भी मनीषा ने चढ़ाई की थी। 26 जनवरी के दिन इस चोटी पर चढ़ने वाली मनीषा भारत की पहली महिला है। एवरेस्ट पर देश का तिरंगा और विश्वविद्यालय का लोगो लेकर गई थी।

ऐसे चढ़ना पड़ता एवरेस्ट की बर्फीली चोटी पर

शेरपा ने भी छोड़ दिया था साथ
मनीषा कहती है कि माऊंट एवरेस्ट की चढ़ाई के दौरान मौसम के हालातों को देखते हुए कैंप चार से आगे शेरपा ने भी जाने की सलाह नहीं दी थी और वापिस लौटने के लिए कहा था, लेकिन उसकी जिद्द थी। हर हाल में एवरेस्ट पर जाना है। आक्सीजन सिलेंडर भी खत्म हो गया था। एक साथी ने उसे बचाया। सात लड़कों के दल में मनीषा अकेली महिला पर्वतारोही थी। एवरेस्ट पर रात को ही चढ़ाई करनी पड़ती है। दिन में गर्मी के कारण बर्फ पिघल कर गिरने का खतरा रहता है। डैड जोन के लगभग बीस घंटों की यात्रा तो बेहद खतरनाक होती है।
माऊंट एवेस्ट सीरियल से पला सपना
मनीषा का कहना है कि दो हजार 15 में एक टीवी चैनल पर माऊंट एवरेस्ट सीरियल आता था। उस सीरियल को देखते हुए उसने तय कर लिया था कि वो हर हाल में माऊंट एवरेस्ट का शिखर छूएगी।

विश्वविद्यालय की पढ़ाई के दौरान बाइक वाली के नाम से मशहूर 

जानकारों से छुपाई थी ट्रेनिंग की बात
मनीषा के पिता महेंद्र सिंह हरियाणा पुलिस में उप निरीक्षक हैं। उन्होंने हर कदम पर साथ दिया और हौंसला बढ़ाया। लेकिन मां का विश्ववास उस समय डगमगा गया था जब उसने पर्वतारोहण की बात की, लेकिन धीरे-धीरे समझ गई और साथ देने लगी। जब वह शुरु में ट्रैकिंग ट्रेनिंग के लिए गई तो उसके रिश्तेदारों से ये छुपाया गया कि वह पर्वतारोहण की ट्रेनिंग ले रही है। मनीषा मूल रूप से जिला फतेहाबाद के गांव बनावली की रहने वाली है।

कड़ी ट्रेनिंग ने बनाया एवरेस्ट पर चढ़ने के काबिल

छोड़ दी नौकरी
मनीषा को गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय हिसार से बीटैक की पढ़ाई करते ही अच्छी नौकरी मिल गई थी, लेकिन उसने पर्वतारोहण के लिए यह नौकरी छोड़ दी। उसके बाद उन्होंने इसी विश्वविद्यालय से ही एमबीए का कोर्स पूरा किया। आजकल इसी विश्वविद्यालय में एनसीसी इन्सटैक्टर के पद पर कार्यरत हैं।
मिल चुके हैं कई पुरस्कार
मनीषा को कल्पनाचार्य शौर्य अवार्ड, यूथ आईकॉन अवार्ड के अतिरिक्त सीएम मनोहर लाल द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त सामाजिक संस्थाओं तथा प्रशासन द्वारा कई बार सम्मानित किया जा चुका है। जिला फतेहाबाद की बेटी-बचाओं, बेटी पढ़ाओ अभियान में भी काम रही हैं। सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर सामाजिक कार्यों में भी भरपूर योगदान दे रही हैं। मनीषा की तमन्ना अभी और भी कई शिखर छूने की है।

सीएम मनोहर लाल द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है
एवरेस्ट चढ़ाई के दौरान आते हैं ऐसे डरावने तूफान

इस साक्षात्कार को नौ अक्टूबर 2020 को पोस्ट किया गया था। इस पर मिल रही प्रतिक्रियाओं और युवाओं के लिए प्रेरणादायक होने के कारण इसे फिर से पोस्ट किया जा रहा है
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