Home जीवनमंत्र गुरु कृपा से हुई  शाप मुक्ति-जीवनमंत्र 24c

गुरु कृपा से हुई  शाप मुक्ति-जीवनमंत्र 24c

गुरु पर हमेशा विश्वास रखो

एक बार एक शिष्य भिक्षा लेते हुए अपने गुरु का गुणगान कर रहा था। शैतान गुरु के गुणगान से ईर्ष्या करता था। उसने शिष्य को श्राप दिया कि वो सुबह का सूर्य नहीं देखेगा। उसकी कल सूर्योदय से पूर्व मृत्यु निश्चित है।

 उस शैतान का श्राप खाली नहीं जाता था।

शिष्य डर गया, वह गुरु के पास पहुंचा तो गुरुदेव ने हँसते पूछा कि भिक्षा ले आया?

शिष्य–‘जी गुरुदेव! भिक्षा में अपनी मौत ले आया!  और सारी घटना सुना दी।’

गुरुदेव बोले ‘अच्छा चल भोजन कर ले।’

शिष्य ने कहा गुरुदेव! आप भोजन करने की बात कर रहे है और यहाँ मेरा प्राण सुख रहा है। भोजन तो दूर एक दाना भी मुँह में न जा पाएगा।

 गुरुदेव ने कहा ‘अभी तो पूरी रात बाकी है अभी से चिंता क्यों कर रहा है।’ 

फिर सोने की बारी आई तब गुरुदेव ने  शिष्य को बुलाकर बोले– ‘हमारे चरण दबा दे, चाहे जो भी चरण छोड़ कर मत जाना कही।’

शिष्य ने कहा ‘जी गुरुदेव कही नही जाऊँगा।’गुरुदेव ने अपने शब्दों को तीन बार दोहराया कि चरण मत छोड़ना, चाहे जो हो जाए। 

 यह कह कर गुरुदेव सो गए।शिष्य पूरी भावना से चरण दबाने लगा।  रात का पहला पहर बीतने को था तब शैतान ने एक देवी रुप महिला को भेजा, उसने गुरु के शिष्य को धन दौलत का प्रलोभन दिया कि वह उसके पास आ जाए। लेकिन युवा साधक ने अपने गुरुदेव के पैर नहीं छोड़े।  पहला प्रयास असफल हुआ तो शैतान ने उसी महिला को उसकी माँ के रूप देकर भेजा। मां बनकर उस महिला ने शिष्य को गुरु से अलग करने का प्रयास किया।
    शिष्य   गुरु महाराज जी के चरण दबाने की सेवा कर रहा था तब रात्रि का दूसरा पहर बिता ओर तांत्रिक ने इस बार उस शिष्य की माँ की रूप बनाकर भेजा। मां के रूप में आई उस महिला ने जब उसे बुलाया तो शिष्य बोला– क्षमा करना मां! लेकिन मैं वहाँ नही आ सकता क्योंकि अभी गुरुचरण की सेवा कर रहा हूँ। मुझे भी आपसे गले लगना है इसलिए आप यही आ जाओ। 

रात्रि का तीसरा पहर बिता ओर इस बार शैतान ने यमदूत रूप वाला राक्षस भेजा।  राक्षस पहुँच कर शिष्य से बोला कि चल तुझे लेने आया हूँ तेरी मृत्यु आ गई है। उठ ओर चल…शिष्य भी झल्लाकर बोला– काल हो या महाकाल मैं नही आने वाला ! अगर मेरी मृत्यु आई है तो यही आकर ले जाओ मुझे। लेकिन गुरु के चरण नही छोडूंगा! बस।फिर राक्षस भी चला गया। 

सुबह हुई चिड़ियां अपनी घोसले से निकलकर चिचिहाने लगी। सूरज भी उदय हो गया।  गुरुदेव महाराज जी नींद से उठे और बोले कि– सुबह हो गई?शिष्य बोला– जी! गुरुदेव सुबह हो गईगुरुदेव— अरे! तुम्हारी तो मृत्यु होने वाली थी न तुमने ही तो कहा था कि शैतान का श्राप कभी व्यर्थ नही जाता। लेकिन तुम तो जीवित हो… गुरुदेव हँसते हुए बोले….

सार यही है कि जीवन मे अपने गुरु और शिक्षक पर हमेशा विश्वास रखो। 

आपका दिन शुभ हो!!!!!

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